Archive for the ‘ Hindi Gazhal ’ Category

इसी लिए ज़िंदा हे हम आज भी


इसी लिए ज़िंदा हे हम आज भी वो ख़याल से,
कन्हि ये इल्ज़ाम ना लगा दे दुनिया वाले,
के महोब्बत मे मरने वाले ख़ुदग़र्ज़ होते हे!

उनका दिल आज भि मेरे पास हे,
के महोब्बत से जुड़े दो दिल, महफूज़ होते हे!
कहां दिखते हे वो हसीन सितम,
ऐसे राज़ तो कब्र मे दफ़न होते हे!

 

-Dardil

દુખતી નસ – उनकी रुसवाई से गमजदा तो हम हुए


उनकी रुसवाई से गमजदा तो हम हुए, नाम लेके हमारा भला वो क्यूँ रोते हैं!
सुना है मारते हैं ठोकर जो हसीन गुलाब को, कांटो के झख्म उन्ही के पैरों मे होते हैं!!

– મુક્ત ઉર્મી (નેહા વર્મા)

નેહા બેન (Cygnet Infotech) નુ આ પેહલુ ક્રિયેશન છે. સાભાર અંહી રજૂ કરુ છુ!!!

पीठ पे जीतने घाव हे


पीठ पे जीतने घाव हे, उतनी जंग हम हार गए,
छाती पे जीतने जेले घाव, उतने दुश्मन परास्त हुए!

– दर्दिल

કોઈ આપતુ નથી, તેથી છીનવવા ની પ્રથા છે


કોઈ આપતુ નથી, તેથી છીનવવા ની પ્રથા છે,
આંસુઓ ની કિંમત નથી, તેથી દિલપર ભાર છે!
ટોળાઓ મા બુદ્ધિ નથી, તેથી બદમાશ બાદશાહ છે,
સંતોષ ની રોટલી જો ભાવી હોત, તો દુનિયા ઘણી સારી હોત!

-દર્દિલ

कुछ कर गुज़र


सोच सोच सोच,
सोच के कुछ कर गुज़र!

सुबह हे तेरी,
रात के अंधेरो से मत डर,
कुछ कर गुज़र!

आज़ाद हे तू, आज़ादी तेरी,
मत छुना, गुलामी के पैर,
कुछ कर गुज़र!

धरती अंबर और समंदर, सब तेरा,
तुने ठानी हे अगर,
कुछ कर गुज़र!

सोच तेरा हथियार हे,
छा जा, एक लहर बन कर!
कुछ कर गुज़र!

हे जज़्बा दिल मे अगर,
आएगा वो रहनुमा बन कर!
कुछ कर गुज़र!

सोच सोच सोच,
सोच के कुछ कर गुज़र!

-दर्दिल (महेश चावडा)

क्या करेगी हिज़डो की फ़ौज़


आँधियाँ आती हे, चली जाती हे रोज़,
मर्द होते हे जो टकराते हे उनसे,
क्या करेगी हिज़डो की फ़ौज़!!!

साँस मे तेरी बेहने के लिए


साँस मे तेरी बेहने के लिए, ये हवाएँ चली होंगी!
देख के तेरा चेहरा, पेहली कली खिली होंगी!!
यूँही नही उठते ज़नाज़े इतने एक साथ…
कुछ तो वज़ह रही होंगी !!!

-दर्दिल (महेश चावडा)