Archive for જૂન, 2015

ઍક બુંદ થી પલળીયો તો હું…


ઍક બુંદ થી પલળીયો તો હું...

દુખતી નસ – उनकी रुसवाई से गमजदा तो हम हुए


उनकी रुसवाई से गमजदा तो हम हुए, नाम लेके हमारा भला वो क्यूँ रोते हैं!
सुना है मारते हैं ठोकर जो हसीन गुलाब को, कांटो के झख्म उन्ही के पैरों मे होते हैं!!

– મુક્ત ઉર્મી (નેહા વર્મા)

નેહા બેન (Cygnet Infotech) નુ આ પેહલુ ક્રિયેશન છે. સાભાર અંહી રજૂ કરુ છુ!!!

पीठ पे जीतने घाव हे


पीठ पे जीतने घाव हे, उतनी जंग हम हार गए,
छाती पे जीतने जेले घाव, उतने दुश्मन परास्त हुए!

– दर्दिल