Archive for ઓગસ્ટ, 2014

साँस मे तेरी बेहने के लिए


साँस मे तेरी बेहने के लिए, ये हवाएँ चली होंगी!
देख के तेरा चेहरा, पेहली कली खिली होंगी!!
यूँही नही उठते ज़नाज़े इतने एक साथ…
कुछ तो वज़ह रही होंगी !!!

-दर्दिल (महेश चावडा)