Archive for જૂન, 2012

ए दोस्त हम इतने तन्हा ना होते


आँसुओ की बारिश्मे ना नहाते,
गर आशियाने हमारे भी होते !

ए दोस्त हम इतने तन्हा ना होते,
गर दरमियाँ फ़ासले ना होते !

ना डूबते मजधार में,
बाँहे फेलाए किनारे जो होते !

– (दर्दिल) महेश चावडा

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माँ खादी की चादर दे दे मुझे…


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