तेरे कानो की बालिओ मे…


उस दिन तुम्हारी सहेलिओ को देखा तो लगा मेरी बात चल रही हे,
तेरे कानो की बालिओ मे, मेरी गूँज चल रही हे!
खाली मेखानो मे, प्यालों की सब-ए-बारात चल रही हे,
कोन पिएगा शराब, तेरे दरबार मे मेरी अर्ज़ी रुक पड़ी हे||

-दर्दिल
महेश चावडा

प्रभु चरण पुष्प अर्पित – 5 ऑगस्ट 2020


राम जपे सब राम कहे, बस एक नाम राम नाम|
कहीं राम दिसे, कहीं राम बसे तेरे मेरे मनमें राम|
मेरे भजन राम, तेरे सजन राम, एक नाम राम नाम|
हर कंठ बसे हर कंठ भजे ओर ना दूजो कोई नाम|
कहीं शीतल राम, कहीं तपे राम, एक नाम राम नाम|
जग बिसरे सारे सुख दूख, एक ना बिसरे राम नाम|

प्रभु चरण पुष्प अर्पित
-दर्दिल
5 ऑगस्ट 2020

ભલાઈ નો ભ્રષ્ટાચાર


હું ઍવો ગુનેગાર બન્યો,
મે ભલાઈ નો ભ્રષ્ટાચાર કર્યો!
દુખડા ના દામ આપી ને,
સુખડાનો વ્યાપાર કર્યો!

 

-Dardil

સુવાદે જાગીશ તો ઈચ્છાઓ થશે


केसा मॉसम आया हे, जिंदा ही मरजाने का


केसा मॉसम आया हे, जिंदा ही मरजाने का|
मिलेना हमसे कोई, खुदसे ही मिल जाने का|

कुछ बोने इंसानो ने, कुदरत से खिलवाड़ किया|
कुदरत ने सहा बहुत, अब पलट के वार किया|
केसा मॉसम आया हे, जिंदा ही मरजाने का|
मिलेना हमसे कोई, खुदसे ही मिल जाने का|

कैसे आज़ाद परिंदो जेसे उड़ते रहते थे,
दूसरे की आज़ादी को नोचते रहते थे|
अब अपनी बरी आई, कितना वो बेचेन हुवा|
केसा मॉसम आया हे, जिंदा ही मरजाने का|
मिलेना हमसे कोई, खुदसे ही मिल जाने का|

नदियाँ अंबर कुछ ना छोड़ा, धरती का सीना निचोड़ा!
ए इन्सा तू कहीं ना ठहरा, डाला हर जगह डेरा|
अब अपनी बरी आई, कितना वो बेचेन हुवा|
केसा मॉसम आया हे, जिंदा ही मरजाने का|
मिलेना हमसे कोई, खुदसे ही मिल जाने का|

–दर्दिल

જે કિનારેથી હું પાછો વળ્યો


Sea shore

જે કિનારેથી હું પાછો વળ્યો, ઈ કિનારે દરિયો હતો,
સાલુ છબછબિયાય ના કર્યા!

તને જોઈ ને થયેલો, ઈ ઉમળકો સાચો હતો,
સાલુ અમે હૈંયે ના ઠર્યા!

હાથ લાગ્યુ ખાલી છિપરુ, ઈ સાચા મોતી હતા,
સાલુ હાથ ના કર્યા હૈંયે વાગ્યા!

ખાલી વિરડા ઉલેચે કોણ?
બુજાયેલ આગમા, બળતણ હોમે કોણ?
સાલુ ના તલવારે, ના ભાલે!
અમે તો વહેમે મર્યા!!

-દર્દિલ (મહેશ ચાવડા)

ચાલ બેટા, જિંદગી આવીજ છે!


ચાલ બેટા, જિંદગી આવીજ છે!

રાત શું, દિવસ શું?
મહેનતૂ ને વિસામો શુ?
તરસ છે તને? આગળ પાણી છે!
ચાલ બેટા, જિંદગી આવીજ છે!

સફળ શું, નિષ્ફળ શું?
કશૂક ના મળે તો રડવાનુ શું?
જો આગળ કોઈ સૂતૂ ભુખ્યુ છે!
ચાલ બેટા, જિંદગી આવીજ છે!

જન્મ શું, મરણ શું?
મરતા મરતા જીવવાનુ શું?
કોઈ જીવતા મૃત, કોઈ મૃત હજી જીવે છે!
ચાલ બેટા, જિંદગી આવીજ છે!

“દર્દિલ” નિરાશા થી થાક્યો શુ?
અંહી રોજ અરૂણોદય થાય છે!
જો તારી સાથે પપ્પા છે!
ચાલ બેટા, જિંદગી સારિજ છે!

-Dardil (Mahesh Chavda)

જીવ (સત્તા) શરીર મોહ માયા (ભ્રષ્ટાચાર)


જીવ (સત્તા) અલગ શરીર (કોંગ્રેસ કે BJP) ધારણ કરે છે. પણ જીવ થી મોહ માયા (ભ્રષ્ટાચાર) અલગ થતી નથી. ઍ આત્મા (પબ્લિક) જાણે છે!

 

-દર્દિલ

जब तू जाता हे


डाली डाली बिखर जाता हूँ, जब तू जाता हे|
पत्ता पत्ता सुख जाता हूँ, जब तू जाता हे|

कुछ दीनो की बात हे, ये तू कहता हे|
सालो-साल तरस जाता हूँ, जब तू जाता हे|

घर, चोराहा, बस्ती, शहर, रास्ते…
गली गली ठहर जाता हूँ, जब तू जाता हे|

ख़याल रखना अपना, ये तू कहता हे|
तेरे इश्क़ का मरीज़!…
बिन मौत मर जाता हूँ, जब तू जाता हे|

-दर्दिल (महेश चावडा)

हाँ पुकारो मुझे! मे आउगाँ


हाँ पुकारो मुझे! मे आउगाँ. और क्यूँ ना आउँ? जब मेने तुंजे पूकारा था तो तू आया,
आया ओर मेरे साथ खेला, मेरे साथ हसा और बड़ाभी हुवा|
और तुम तब आए जब मे हसना भूल गया था, तुमने फिरसे मुझे हसाया था|
क्यूँ ना आउँ? जब मे बचपन भूल गया था तो तुम्हारी नन्ही सी मुस्कान ने मुझे…
फिर बच्चा बना दिया था|

हाँ पुकारो मुझे! पुकारो ही क्यों? पूछो जो पूछना हे.
तुम्हारे कुछ सवाल ऐसे, जिनके जवाब तब नही थे पर आज हे!
तुम्हारे उन सवालो मे मुझे मेरेभी जवाब मिलजाते हे!

पूछो और मांगभी लो मुजसे. तुम्हारी उन माँगो मे कुछ मेरी भी माँगे पूरी होती हे,
जो कभी अधूरी सी रह्गयि थी|

तुम मुझे पूकार सकते हो! कन्हि भी कभी भी. तुम्हारी हर पूकार मुझे इस मुर्दो के
स्मशान से वापस जीवन की लहराती वादियों मे ले जाती हे.
अगर तुम्हे लगे के मे दूर निकलता जाता हूँ इनमे, तो थोड़ी ज़ोर से आवाज़ देना,
में लॉट के आउगाँ, और क्यों ना आउँ? मुझे आना हे. मुझे आना ही हे|

अपनी बेटी को -दर्दिल (महेश चावडा)